Friday, 30 May 2014

"मतदाता संगठन" की पार्टी रहित सरकार बनने पर हरियाणा में ग्रामीण क्षेत्रों में हम इन कार्यों को करने का संकल्प करते है :-
a. प्रत्येक गांव में स्वाबलंबी और सेल्फ सस्टेंड (स्वंयधारी) ग्रामीण अर्थव्यवस्था योजना को लागू किया जाएगाl
b. ग्राम सभाओं को ही मुख्य रुप से शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार और इंफ्रास्टक्टर विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगीl
c. पूरे जिले की ग्राम सभाएं मिल कर आपसी आर्थिक संयोजन और तालमेल से बेरोजगारी के संपूर्ण समाप्ति और सौ प्रतिशत रोजगार निर्मित करने के लिए जिम्मेदार होंगेl जिले से बाहर कोई भी बेरोजगार नहीं जाएगाl
d. गांव ब्लाक और जिले स्तर पर मार्केटिंग युनिट की स्थापना होगी ताकि किसानों की फसल उचित दामों पर बाजार में भेजा जा सकेl
e. ग्राम सभाओं के द्वारा लिए गए फैसले को क्रियांवित न कर पाने की स्थिति में जिले में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार माना जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगीl
e. गांव/ब्लाक/जिले में रहने वाला आदमी भूखा न सोए इसके जिम्मेदारी जिले में काम करने वाले अधिकारियों की होगीl
f. स्थानीय संसाधनों के आधार पर विकास और ओद्योगिकरण का नया ढांचा तैयार किया जाएगाl
g. एक तरफ खेती को आर्थिक रुप से उपयोगी बनाया जाएगाl कृषि को उद्योग से जोडा जाएगा और खेतिहर मजदूरों को एग्रोबेस्ड इंडस्ट्री में प्रार्थमिकता दी जाएगीl
h. हर ब्लाक में अन्न भंडारन की सुविधा दी जाएगी ताकि अनाज बर्बाद न हो सकेl

Wednesday, 28 May 2014

क्या भारतवर्ष के उन महान क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान देकर देश को आजाद कराते समय यही सपना संजोया था कि उनके बाद उन्हीं के विश्वासपात्र उनके बलिदान की ये कीमत चुकाएंगे?
क्या उन्होंने कभी सोचा था कि वे जिन्हें अपना वारिस बनाकर देश की सत्ता सौंप कर जा रहे हैं वही नेता एक दिन 'भारत-माता' की आँखों से खून के आंसू बहाने पर उसे मजबूर कर देंगे?
क्योंकि राजनैतिक पार्टियों का यही चरित्र है l इन्हें अंग्रेजों की 'फूट डालो राज करो' की नीति विरासत में मिली है
"मतदाता संगठन" शहीदों व उनके परिवारों के सम्मान के लिए भी हरसंभव कार्य करेगा

Monday, 26 May 2014

"मतदाता संगठन" की एक पार्टीरहित सरकार बनने पर हम निम्नलिखित वायदे पूरा करने के लिए कृतसंकल्प है :-
3. सरकारी शिक्षण संस्थानों में सुधार: राज्य के सभी सरकारी स्कूलों एवं कॉलेजों का निजी शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर आधुनिकीकरण किया जायेगा l
4. अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा: राज्य में सभी लड़के -लड़कियों को सरकारी स्कूलों में १२वीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जायेगी और सभी बच्चों को १२वीं कक्षा तक की पढ़ाई दिलवाना सभी माता -पिता के लिए अनिवार्य होगा l
5. विज्ञान एवं तकनीकि शिक्षा का विकास: राज्य में वर्तमान एवं भविष्य की जरूरतों तथा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विज्ञान एवं तकनीकि शिक्षा का नियमित सुधार किया जायेगा l
6. शिक्षण संस्थानों तक परिवहन व्यवस्था: राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों तक परिवहन की उचित सुविधाएं प्रदान की जाएंगी l

नरेंद्र मोदी जी को जीत की शुभकामनाओं के साथ एक प्रश्न मेरे मन में पैदा हो रहा है कि क्या वो उन सांसदों पर कठोर कारवाई कर पाएँगे जिन पर ढेरों आपराधिक मामले चल रहे है, जिन पर भ्रष्टाचार के मामले चल रहे है क्योंकि अगर वो ऐसा नहीं कर पाते है तो देश को हर हाल में पार्टी रहित व्यवस्था को अपनाना होगा ताकि देश को मजबूत बनाया जा सके और "मतदाता संगठन" इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कृतसंकल्प है

Saturday, 24 May 2014

'मतदाता संगठन' की सरकार बनने पर हमारी प्राथमिकताएँ होगी :-
1. प्रशासनिक सुधार :- 'मतदाता संगठन' की सरकार शासकीय एवं प्रशासनिक सुधार कर के, गाँव, शहर तथा जिले में, सभी नागरिकों को तमाम जरूरी सेवाएं, जैसे कि जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जमीन की रजिस्ट्री तथा चालान आदि, ग्राम पंचायत, ग्राम सभा अथवा वार्ड स्तर पर प्रदान करने के लिए वचनबद्ध हैl
2. समान अधिकार एवं स्वच्छ प्रशासन :- 'मतदाता-राज' सरकार शिक्षा, चिकित्सा, सुरक्षा तथा महिलाओं के कल्याण एवं सम्मान के लिए समूचे प्रदेश में सबको समान अधिकार तथा भय मुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त, शोषण मुक्त, कुपोषण मुक्त एवं अपराध मुक्त शासन देने के लिए प्रतिबद्ध हैl

Friday, 23 May 2014

नौजवानो से आवाहन आज के इस आधुनिक युग में रोजगार मांगना सरल नहीं है इसलिए अब अपने अधिकारों को पाने का समय है आख़िर अधिकार क्या हैं हमारे?
1. देश के संसाधनो से होने वाली आमदनी में सब की समान हिस्सेदारी हो
2. जैसे सरकार ने गरीबी रेखा तय की हुई है वैसे ही अमीरी की सीमा भी बननी चाहिए क्योंकि आर्थिक न्याय के बिना सब धोखा ही है
मतदाता संगठन आपको इस दिशा में सहयोग करने के लिए कृतसंकल्प है इसलिए आप मतदाता संगठन का हिस्सा अवश्य बने क्योंकि हम सब मिलकर लड़ेंगे तो जरूर जीतेंगे
जय हिन्द जय भारत

Wednesday, 21 May 2014

मतदाता संगठन - जहाँ हर व्यक्ति  को अपने हितों के बारे में सोचने का अथवा फैसला लेने का हक़ होगाl इससे हम उन महान शहीदों के सपने को साकार करते हुए उन्हीं के सपनों का भारत बनाने में अवश्य कामयाब हो सकेंगे और यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजली भी होगी जिन्होंने हमारे कल को सुरक्षित देखने के लिए हँसते-हँसते  अपने आज को मिटा डाला था, मगर कितने दुःख की बात है कि हमारे स्वार्थी राजनेताओं तथा उनके राजनितिक दलों ने आज तक उनकी शहादत का अपमान ही किया है तथा हमेशा अपने अथवा अपने दलों के निजी हितों को ही सर्वोपरि माना हैl इन्होंने देश अथवा देश की जनता को हमेशा नजरअंदाज  ही किया हैl
अतः आप सभी से निवेदन है कि राज्य अथवा राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए अपने स्वयं के "मतदाता संगठन" का तुरन्त हिस्सा बनें तथा अपने तरीके से सब की भलाई के लिए इसे आगे बढ़ाएं अथवा अपने सबके जीवन को खुशहाल बनाने के लिए अपना हर तरह से योगदान देंl आपको भरोसा दिलाना चाहता हूँ की आपको इसके लिए कभी पछताना नहीं पड़ेगा बल्कि अपने आप पर आप सभी को गर्व महसूस होगाl

सभी राजनैतिक पार्टियों का चरित्र एक जैसा ही है और ये देश का भविष्य नहीं बदल सकती l लेकिन मैं अपनी ईमानदार कोशिश में निरन्तर लगा हुआ हूँ l अतः आप सबसे निवेदन है कि आप सब इस मुहिम में मेरा साथ दें ताकि हम सब मिलकर आम सहमति से ईमानदार और चरित्रशील लोगों को संसद एवम विधान सभा में भेजें और देश को 'पार्टीतंत्र' से मुक्त करा कर एक सच्चे लोकतंत्र अथवा प्रजातंत्र की स्थापना करें जहाँ एक आम इन्सान को अपनी भलाई के लिए फैसले लेने और क़ानून बनाने का हक़ होगा तथा इस प्रकार वह अपने अधिकारों की रक्षा स्वयं कर सकेगा और इस तरह हम अति पीड़ित और दुःखी 'भारत-माता' को काले और भ्रष्ट अंग्रेजों के चंगुल से आजाद कराने में कामयाब हो सकेंगे l

आप सबसे निवेदन करना चाहूँगा कि अब समय आ गया है कि राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुये हमें तुरन्त इन बातों का संज्ञान लेना होगा तथा अपने निजी हितों या निजी स्वार्थों अथवा रिश्ते-नातों से ऊपर उठकर एक कड़ा फैसला लेना होगाl हमें राजनीतिक दलों से छुटकारा पाना होगा ताकि हम सबकी भलाई को देखते हुये और सबकी सहमति से अपनी पसंद के यानि जनता की पसंद के ईमानदार और चरित्रशील लोगों को चुन कर अपने सच्चे प्रतिनिधि के रूप में संसद या विधान सभा भेज सकेंl इससे हम असली आजादी पा सकेंगे जो कि अंग्रेजों के जाने के बावजूद भी हमें आधी-अधूरी ही मिल पाई है और इसी बात को ध्यान में रखते हुये हमने काफी लोगों से सम्पर्क एवं सलाह करने के बाद आने वाले हरियाणा विधान सभा चुनावों के मध्य-नजर "मतदाता संगठन" का गठन किया है जहाँ किसी व्यक्ति विशेष के पास कोई अधिकार नहीं होंगे बल्कि सबकी आम सहमति से ही सभी प्रतिनिधियों का चयन अथवा चुनाव किया जायेगा तथा सबकी आम सहमति से ही सारे काम काज होंगे तथा सबकी भागीदारी से ही राज्य का दिन-प्रतिदिन का शासन चलाया जायेगाl

Saturday, 17 May 2014

आम चुनाव- 2014 के परिणामों का विश्लेषण
प्रिय साथियो, मैं आम चुनाव- 2014 के परिणामों का विश्लेषण आपके सामने दोहरा रहा हूँ  तथा कुछ भी लिखने से पहले यह साफ़-साफ़ बताना चाहता हूँ कि मेरा किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई सम्बन्ध नहीं है बल्कि केवल मानवता के आधार पर या फिर देश के आज के हालात के हिसाब से ही एक कड़वी सच्चाई से आपका सामना कराने जा रहा हूँl हो सकता है आपका सम्बन्ध किसी किसी पार्टी से रहा हो अतः आप सबसे भी निवेदन है कि कृपया आप उस रिश्ते को अलग रख कर इस विश्लेषण को पढ़ें और इसकी अच्छाई-बुराइयों का निष्पक्ष आंकलन करेंl
देश के मौजूदा हालातों को देखते हुए देश में बदलाव की सख्त जरूरत थी तथा जनता ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए बदलाव कर भी दिया है और यह भी सच है कि हमारे सामने आज की स्थिति के हिसाब से इस के सिवाय दूसरा कोई विकल्प बचा भी नहीं थाl अतः जो भी  देश की जनता ने फैसला किया है वह सोच समझ कर ही किया है क्योंकि विदाई वाली सरकार ने पिछले दस वर्षों में आम नागरिक को कष्ट ही दिए हैंl आम इन्सान लगातार बढ़ती महंगाई से परेशान था, भुखमरी से परेशान था, बेरोजगारी से दुखी था, बढ़ते हुए बेकाबू भ्रष्टाचार से त्रस्त था तथा उसके सामने जो भी विकल्प थे उन में से जो सही लगा उसे उसने चुन लिया तथा अब आने वाली नई सरकार का नैतिक धर्म बनता है कि जनता के सामने किये हुए वायदे पूरे करे और उनकी आशाओं पर खरी उतरेl अब यह सब तो आने वाला समय ही बताएगा कि यह सरकार जनता कि उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती हैl इस समय तो हम इन्हें केवल शुभकामनाएं ही दे सकते हैं तथा आने वाले समय की इन्तजार करने के सिवाय हमारे पास और कोई रास्ता भी नहीं हैl
अब आगे मैं आपको एक कड़वी सच्चाई से अवगत कराना चाहूँगाl पिछले करीब ६७ वर्षों का इतिहास हमें बताता है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी देश कि असली समस्याओं से विचलित नहीं है तथा उन्हें जनता की भलाई से कोई ख़ास सरोकार नहीं रहा हैl भ्रष्टाचार कमोवेश हर पार्टी से जुड़ा हुआ है तथा गन्दे चरित्र के लोगों का हर पार्टी से नाता पहले भी रहा है और आज भी हैl अतः हमें चुनाव के नतीजों से बहुत अधिक प्रसन्न होने कि आवश्यकता नहीं हैl कोई व्यक्ति एक पार्टी में भ्रष्ट कहलाता है या चरित्रहीन कहलाता है तो कोई परेशानी की बात नहीं है, वह उस राजनीतिक दल को छोड़ कर तुरन्त दूसरे दल का दामन थाम लेता है और वहां जाते ही उसके सारे अपराध नजरअंदाज हो जाते हैं और उस दल के लिए वह एक नेक इन्सान बन जाता हैl उसका वहां बाहें फैला कर स्वागत किया जाता है और तो क्या पिछले दल ने उसे टिकट नहीं दी थी तो यहाँ उसे खुद के सदस्यों से आगे बढ़ कर उसे टिकट दे दिया जाता है और जनता भी बगैर उसके दोषों को देखे तथा उसकी चरित्रहीनता को भी किनारे करते हुए, केवल उस राजनीतिक दल के नाम से उसे चुन कर संसद अथवा विधान सभा भेज देती हैl क्या हमारे लिए ऐसे व्यक्ति से कोई अच्छी उम्मीद लगाना बेमानी नहीं होगाl तो क्या हमें अपनी अंतरात्मा के अन्दर झांक कर यह सोचने की आवश्यकता नहीं है कि हमने भावुक होकर एक गलत आदमी को अपना प्रतिनिधि चुनकर अपने हितों की रक्षा करने के लिए भेज कर मानवता के खिलाफ फैसला लिया हैl
अतः आप सबसे निवेदन करना चाहूँगा कि अब समय गया है कि राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुये हमें तुरन्त इन बातों का संज्ञान लेना होगा तथा अपने निजी हितों या निजी स्वार्थों अथवा रिश्ते-नातों से ऊपर उठकर एक कड़ा फैसला लेना होगाl हमें राजनीतिक दलों से छुटकारा पाना होगा ताकि हम सबकी भलाई को देखते हुये और सबकी सहमति से अपनी पसंद के यानि जनता की पसंद के ईमानदार और चरित्रशील लोगों को चुन कर अपने सच्चे प्रतिनिधि के रूप में संसद या विधान सभा भेज सकेंl इससे हम असली आजादी पा सकेंगे जो कि अंग्रेजों के जाने के बावजूद भी हमें आधी-अधूरी ही मिल पाई है और इसी बात को ध्यान में रखते हुये हमने काफी लोगों से सम्पर्क एवं सलाह करने के बाद आने वाले हरियाणा विधान सभा चुनावों के मध्य-नजर "मतदाता संगठन" का गठन किया है जहाँ किसी व्यक्ति विशेष के पास कोई अधिकार नहीं होंगे बल्कि सबकी आम सहमति से ही सभी प्रतिनिधियों का चयन अथवा चुनाव किया जायेगा तथा सबकी आम सहमति से ही सारे काम काज होंगे तथा सबकी भागीदारी से ही राज्य का दिन-प्रतिदिन का शासन चलाया जायेगाl
जहाँ हर व्यक्ति  को अपने हितों के बारे में सोचने का अथवा फैसला लेने का हक़ होगाl इससे हम उन महान शहीदों के सपने को साकार करते हुए उन्हीं के सपनों का भारत बनाने में अवश्य कामयाब हो सकेंगे और यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजली भी होगी जिन्होंने हमारे कल को सुरक्षित देखने के लिए हँसते-हँसते  अपने आज को मिटा डाला था, मगर कितने दुःख की बात है कि हमारे स्वार्थी राजनेताओं तथा उनके राजनितिक दलों ने आज तक उनकी शहादत का अपमान ही किया है तथा हमेशा अपने अथवा अपने दलों के निजी हितों को ही सर्वोपरि माना हैl इन्होंने देश अथवा देश की जनता को हमेशा नजरअंदाज  ही किया हैl
अतः आप सभी से निवेदन है कि राज्य अथवा राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए अपने स्वयं के "मतदाता संगठन" का तुरन्त हिस्सा बनें तथा अपने तरीके से सब की भलाई के लिए इसे आगे बढ़ाएं अथवा अपने सबके जीवन को खुशहाल बनाने के लिए अपना हर तरह से योगदान देंl आपको भरोसा दिलाना चाहता हूँ की आपको इसके लिए कभी पछताना नहीं पड़ेगा बल्कि अपने आप पर आप सभी को गर्व महसूस होगाl
आपके सकारात्मक कदम की इन्तजार में,
आपका अपना
राम मेहर मलिक

फोन नंo – 9871759977, ई-मेल - rmmalik2003@yahoo.co.in

Friday, 16 May 2014

मीडिया का नैतिक कर्तव्य है की समाज में फैली हुई कुरीतियों से समाज को सजग करे, देश और समाज के हित के लिए जनता को जागरूक करे ; परन्तु ऐसा लगता है की धन कमाने की अंधी दौड़ में लोकतंत्र का यह चौथा स्तंभ अपनी सभी मर्यादाओं को लाँघ रहा है। सभी समाचार पत्रों में संपादक प्रतिदिन  बड़ी-बड़ी पांडित्यपूर्ण सम्पादकीय लिख कर जनमानस को अपनी लेखनी की शक्ति से अवगत करते हैं परन्तु व्यावहारिक रूप में ऐसा लगता है की पैसा कमाने के लिए सभी कायदे कानूनों को तक पर रख दिया गया है . सभी समाचारपत्रों में अश्लील एवं अनैतिक विज्ञापनों की भरमार है , जिससे समाज के लोग गुमराह होते हैं . समाचारपत्र केवल एक लाइन लिखकर लाभान्वित हो जाता है . क्या कभी किसी समाचारपत्र ने ऐसे विज्ञापनों की सत्यता को जांचने की कोशिश की ? क्या ऐसे अश्लील और अनैतिक विज्ञापनों को समाचारपत्रों में छपने भर से वह अपनी जिम्मेवारी से मुक्त हो सकता है? 
 ऐसे बहुत से विज्ञापन हैं जिनमें कोई पता नहीं होता , केवल मोबाईल नंबर दे दिया जाता है क्योंकि लाख कोशिश करने के बाबजूद भी ऐसे विज्ञापनदाताओं ने अपना पता नहीं बताया। इस तरह की कई शिकायतें थाने में दर्ज भी कराई  गई है , परतु उस पर कारवाई नहीं के बराबर होता है। ऐसे विज्ञापनदाता जनता से धन ऐंठकर चम्पत हो जाते हैं। क्या इनके दुराचार में मीडिया भी बराबर का भागीदार नहीं है? संपादक को चरित्रवान एवं देश व समाज के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए , तभी उनके सम्पादकीय  की गरिमा का आभास जन मानस को हो सकेगा और उनके विद्वता का लाभ देश और समाज को मिल सकेगा। 
     आज सामाजिक पतन के लिए काफी हद तक मीडिया भी जिम्मेदार है . यदि इन्टरनेट की बात छोड़ दें तो, इस प्रकार के गुमराह करने वाले विज्ञापनों से की जाने वाली कमाई से देश में और खासकर महानगरों में बलात्कार जैसी घटनाएँ नहीं होंगी तो और क्या होगा? 
पच्चीस बर्ष पहले भी जब पंजाब केसरी समाचारपत्र में विदेशी महिलाओं के अश्लील फोटो छपते थे तो कई सजग पाठकों ने इसका विरोध भी किया था परन्तु यह आज तक जारी है। खास बात यह है कि बहुत से लोग केवल इसी कारण  इस समाचारपत्र को पसंद करते हैं . अब तो प्रायः सभी अखबार यही कर रहे हैं। खेद की बात है कि  हर आदमी धनवान बनना चाहता है , चाहे उसके लिए समाज और देश को कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। जब हम निर्मल बाबा और दूसरे धर्म के ठेकेदारों , भ्रष्ट नेताओं को कोसते हैं ,तो संपादक मंडल को भी अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है कि हम क्यों पेड़ न्यूज़ और भ्रामक विज्ञापन के द्वारा चंद लोगों के लाभ के लिए  
समाज के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं? समाज के कई भद्र कुलीन व्यक्ति इन धोखेबाज लोगों के शिकार होते हैं, परन्तु अपनी बदनामी से बचने के लिए आवाज नहीं उठाते, आवश्यकता है कि  जनहित में छद्म ग्राहक बनकर इनकी गतिविधियाँ जानकर उसका भंडाफोड़ करने के लिए सजग लोग अग्रसर हों। क्या संपादक मंडल राष्ट्रहित में  लिंगवर्धन , मसाज पार्लर , महिलाओं से दोस्ती जैसे भ्रामक विज्ञापनों  पर रोक लगाने का भरसक प्रयास करेगे?

Thursday, 15 May 2014

साथियों, जब हम किसी इंसान को चुन कर अपने प्रतिनिधि के रूप में विधानसभा या संसद में भेजते हैं तो क्या यह सच नहीं है कि हमने उस इंसान में अच्छे गुण देखे होंगे तथा उसे एक काबिल इंसान समझा होगा और तो क्या हमने स्वयं से भी उसको अच्छा माना होगा तभी तो अपने हितों की रक्षा करने के लिए उसे स्वीकार किया और उसे सारे अधिकार दे दिएl
मगर जब हम उसी नेता को दूसरे नेताओं के साथ आपस में गाली गलौच या अभद्र भाषा बोलते देखते हैं तो क्या हमें अपनी पसंद या अपने इस चयन पर दु:ख नहीं होताl क्या हमें इस तजूर्बे से सबक लेकर पार्टियों द्वारा थोपे हुए उम्मीदवार की बजाय आपस में मिलकर आम सहमति से किसी चरित्रशील व्यक्ति का चयन करके चुन कर नहीं भेजना चाहिएl अब समय आ गया है क़ि हमें पार्टियों के कुशासन को नकारते हुए पार्टी रहित विकल्प को अपना लेना चाहिएl
इससे अवश्य ही हम स्वच्छ राजनीति स्थापित करने में कामयाब हो सकेंगे तथा देश का माहौल बेहतर बना सकेंगेl मेरा निवेदन है कृपया इस पर अवश्य मंथन करे और अपने सुझाव देंl  

Wednesday, 14 May 2014

साथियो जैसे अंग्रेजों ने हमारे कुछ लोगों को अच्छे -अच्छे पद और लाभ देकर पुरे भारत पर लम्बे अर्से तक राज किया और जाते जाते भारत देश को खोखला और कुछ चन्द मुट्ठी भर लोगों को देश की बागडोर सौंप गए आज भी वही लोग राज कर रहे हैं ?और ये भी अंग्रेजों वाली नीति से ही राज कर रहे हैं अपनी अपनी पार्टीओ में कुछ लोगों को पद देकर सारे समाज को धोका दे रहे हैं और कब तक झेलोगे इस झूट को ?

Saturday, 10 May 2014

 'मतदाता राज' की अथवा जनता की अपनी सरकार बनने पर भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए हर स्तर पर न केवल सरकार के काम में पारदर्शिता आएंगी बल्कि नीतिगत फैसलों में भी जनता को जानने अधिकार होगा कि यह फैसला क्यों लिया जा रहा हैl जनलोकायुक्त की स्थापना होगीl उच्च पदों पर होने वाले भ्रष्टाचार की जांच सार्वजनिक रुप से कराएंगेl आरटीआई के कानून को मजबूत करेंगेl विदेश और देश की सुरक्षा के मामले को छोड़ कर सरकार के हर फैसले की फाइल को 2 साल के बाद सार्वजनिक किया जाएगाl इसे इंटरनेट पर डाला जाएगाl

Friday, 9 May 2014

हम इस बात की शपथ लेते हैं कि 'मतदाता राज' की अथवा जनता की अपनी सरकार बनने पर एक नया जनतंत्र बनाएंगे.. असली जनतंत्र बनाएंगे..
आपकी मदद से हम महात्मा गांधी, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, जवाहरलाल नेहरू, बाबा भीमराव अंबेदकर, मौलान आजाद और भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव चंद्रेशेखर आजाद अश्फाकुल्लाह जैसे तमाम शहीदों और महापुरुषों के सपने का भारत बनाएंगे. ऐसा जनतंत्र बनाएंगे जिसमें शोषण की कोई जगह नहीं होगी. भ्रष्टाचार नहीं होगा और न ही कोई भ्रष्टाचारी बच पाएगा. हम एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जिसमें सभी दलित, अदिवासी, पिछड़े, घुमंतु, मछुआरे, मुसमलानों और सभी जाति और संप्रदायों के गरीबों का विकास हो

Thursday, 8 May 2014

अब स्कैंडल्स लाखों में नहीं होते, अब करोड़ों में भी नहीं होते, क्योंकि बोफोर्स स्कैंडल 64 करोड़ का था, जिसने राजीव गांधी के हाथ से सरकार ही ले ली थी, लेकिन उसके बाद अब तक पांच हज़ार करोड़, दस हज़ार करोड़, 15000 करोड़, 20,000 करोड़, एक लाख करोड़, एक लाख छिहत्तर हज़ार करोड़ और 26 लाख करोड़ जैसे स्कैंडल हमारे सामने आ चुके हैं. इन सारे स्कैंडल्स में बिना पार्टियों का भेद किए हुए पक्ष और विपक्ष, दोनों के लोग शामिल दिखाई देते हैं. इतना ही नहीं, मनरेगा में घोटाला, किसानों की क़र्ज़ माफी योजना में घोटाला, आत्महत्या के सवाल के ऊपर विदर्भ में भेजे गए पैकेज में घोटाला, अनाज घोटाला और दवा घोटाला, यानी हर तरफ़ घोटालों की जैसे बाढ़ आ गई है.अगर लोकसभा में संविधान के हिसाब से लोगों के प्रतिनिधि होते, लेकिन पार्टियों के प्रतिनिधि न होते, तो उक्त सारे घोटाले न होते, क्योंकि अगर एक व्यक्ति घोटाला करता, तो उसकी कॉन्स्टिटुएंसी के लोग, साथ बैठने वाले उसके दोस्त, संसद में उसके दूसरे साथी उस पर नैतिक प्रभाव डालते और वह भ्रष्टाचार वहीं पर रुक जाता

Monday, 5 May 2014

इन तमाम पहलुओं पर गौर से विचार करने के बाद यह पता चलता है कि आजादी के करीब ६७ वर्ष बीत जाने के बावजूद भी अगर किसी को सरकारी खजाने से या राज्यकोष से वंचित रखा गया है तो वह है 'मतदाता'  जबकि 'मतदाता' हमारी सारी प्रक्रिया के अन्दर एक 'अहम् कड़ी' अथवा 'नींव का पत्थर है' l अगर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करे तो हमारी सारी व्यवस्था ही तहस नहस हो जायेगी अथवा चरमरा जायेगी l लेकिन इसके बावजूद आज तक किसी भी सरकार ने मतदाता की इस अहम् भूमिका के लिए उसे कभी कोई त्वजो नहीं दी l उस मतदाता के मत देने के कारण ही एक व्यक्ति 'विधायक' या 'सांसद' बन जाता है तथा राज्यकोष से भारी भरकम सुख सुविधाएँ हासिल करने का अधिकार प्राप्त कर लेता है l

इस प्रकार जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि तत्काल प्रभाव से राज्यकोष से डेढ़ से दो लाख रूपये महीने के प्राप्त करने का हकदार हो जाता है l मगर जिसने उसे वहां तक पहुचाया है उस व्यक्ति की किसी ने आज तक सुध नहीं ली अर्थात 'मतदाता' को हमेशा सरकारी खजाने से मिलने वाली इस प्रकार की किसी भी सुविधा से वंचित रखा गया है l इसलिए अब यह निर्णय लिया गया है कि 'मतदाता राज' की अथवा जनता की अपनी सरकार बनने पर ६० दिन के अन्दर अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को (चाहे उसने मत किसी के भी पक्ष में डाला हो) आधिकारिक तौर पर ५,०००/- रूपये का भुगतान सरकारी खजाने से किया जायेगा l क्योंकि उस व्यक्ति ने भारतीय संविधान के तहत अपने मताधिकार का प्रयोग करके अपनी ड्यूटी अथवा अपने कर्तव्य का पालन किया है l इस दिन मतदाता अपने सारे काम छोड़ कर ३ से ४ घंटे लाइन में खड़ा होकर अपने इस कर्तव्य को निभाता है l इसके अतिरिक्त वह अपने 'वोटर कार्ड' या 'पहचान पत्र' (जो कि एक सरकारी दस्तावेज है) को भी पांच साल तक संभाल कर रखता है अथवा उसका चौकीदारा करता है l अतः इस सरकारी ड्यूटी को करने के लिए मतदाता को कम से कम ५,०००/- रूपये के मानदेय का भुगतान करना बिल्कुल जायज है जोकि उस द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि के केवल एक दिन के वेतन के बराबर है जिसे वह विधायक या सांसद लगातार १८२६ दिन तक प्राप्त करता है l

Saturday, 3 May 2014

कुछ समय ऐसा वक्त आ सकता है
जब हम अन्याय को रोकने में असमर्थ हों,
लेकिन ऐसा वक्त कभी नहीं आना चाहिए
 जब हम विरोध करने में नाकाम रहें।