Tuesday, 29 April 2014

सुन रहे हो बे विदर्भ के किसानों...
खेती सीखना हो तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले से सीखनी चाहिए...

2009 के चुनावों में सुप्रिया सुले के पास बारामती में 10 एकड़ जमीन थी जिससे उसे 52 करोड़ रूपए की आय हुई थी... 2014 के चुनाव में उसी जमीन से सुप्रिया सुले ने 113 करोड़ रूपए की आय घोषित की है... ("खामख्वाह" आत्महत्याएं करने पर तुले किसानों को सुप्रिया से पूछना चाहिए कि उन्होंने दस एकड़ जमीन पर ऐसा क्या उगाया था, कि पहले 52 करोड़ और फिर पाँच साल में दोगुने से भी अधिक 113 करोड़ की कमाई हो गई...).

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एक तरफ भतीजा बाँधों में मूत-मूत कर 7000 करोड़ के सिंचाई घोटाले कर गया और बेटी अभी खेती सीख रही है... जबकि पवार साहब क्रिकेट की भैंस का दूध निकालने में जुटे हैं...

खैर कोई बात नहीं... हमें साम्प्रदायिकता से लड़ना है, नरेंद्र मोदी को रोकना है... किसानों का क्या है वो तो महाराष्ट्र में थोक के भाव में मरते ही रहते हैं... मोदी को रोको रे बाबा...

Saturday, 26 April 2014

'मतदाता संगठन' गैर राजनैतिक अथवा 'पार्टी रहित' संगठन है जिस में कोई पार्टी अध्यक्ष नहीं, कोई पार्टी सुप्रीमो नहीं तथा कोई आलाकमान नहीं है l यहाँ सीधे प्रजातंत्र के रूप में 'जनता ही मालिक है-तथा जनता ही हाईकमान है' के सिद्धांत पर हम हरियाणा प्रदेश को प्रयोगशाला बना कर देश के सामने एक मॉडल के रूप में पेश करने जा रहे हैं जहां पार्टी-तंत्र ने जो पिछले करीब ६७ वर्षों में नहीं किया, वह केवल ६० दिनों के अंदर लिखित अनुबन्ध के तहत पूरा करने के लिए वचनबद्ध है l

Tuesday, 22 April 2014

पार्टी-तंत्र' के शासन के दौरान आपने कभी भी अपने हित के लिए काम नहीं किया

मित्रो, पिछले करीब ६७ वर्षों के 'पार्टी-तंत्र' के शासन के दौरान आपने कभी भी अपने हित के लिए काम नहीं किया बल्कि हमेशा राजनैतिक पार्टियों या उनके नेताओं के हित के लिए अथवा उनके स्वार्थ सिद्धी के लिए ही काम करते रहे l इसका परिणाम आप सबके सामने है जहाँ आम इन्सान के हिस्से में दुःख या तकलीफों के सिवाय कुछ नहीं आया तथा उसके जीवन का स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है और हमारे नेताओं को इस बात की जरा सी भी चिंता नहीं है l