Wednesday, 28 May 2014

क्या भारतवर्ष के उन महान क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान देकर देश को आजाद कराते समय यही सपना संजोया था कि उनके बाद उन्हीं के विश्वासपात्र उनके बलिदान की ये कीमत चुकाएंगे?
क्या उन्होंने कभी सोचा था कि वे जिन्हें अपना वारिस बनाकर देश की सत्ता सौंप कर जा रहे हैं वही नेता एक दिन 'भारत-माता' की आँखों से खून के आंसू बहाने पर उसे मजबूर कर देंगे?
क्योंकि राजनैतिक पार्टियों का यही चरित्र है l इन्हें अंग्रेजों की 'फूट डालो राज करो' की नीति विरासत में मिली है
"मतदाता संगठन" शहीदों व उनके परिवारों के सम्मान के लिए भी हरसंभव कार्य करेगा

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