साथियों, जब हम किसी इंसान को चुन कर अपने प्रतिनिधि के रूप में विधानसभा या संसद में भेजते हैं तो क्या यह सच नहीं है कि हमने उस इंसान में अच्छे गुण देखे होंगे तथा उसे एक काबिल इंसान समझा होगा और तो क्या हमने स्वयं से भी उसको अच्छा माना होगा तभी तो अपने हितों की रक्षा करने के लिए उसे स्वीकार किया और उसे सारे अधिकार दे दिएl
मगर जब हम उसी नेता को दूसरे नेताओं के साथ आपस में गाली गलौच या अभद्र भाषा बोलते देखते हैं तो क्या हमें अपनी पसंद या अपने इस चयन पर दु:ख नहीं होताl क्या हमें इस तजूर्बे से सबक लेकर पार्टियों द्वारा थोपे हुए उम्मीदवार की बजाय आपस में मिलकर आम सहमति से किसी चरित्रशील व्यक्ति का चयन करके चुन कर नहीं भेजना चाहिएl अब समय आ गया है क़ि हमें पार्टियों के कुशासन को नकारते हुए पार्टी रहित विकल्प को अपना लेना चाहिएl
इससे अवश्य ही हम स्वच्छ राजनीति स्थापित करने में कामयाब हो सकेंगे तथा देश का माहौल बेहतर बना सकेंगेl मेरा निवेदन है कृपया इस पर अवश्य मंथन करे और अपने सुझाव देंl
मगर जब हम उसी नेता को दूसरे नेताओं के साथ आपस में गाली गलौच या अभद्र भाषा बोलते देखते हैं तो क्या हमें अपनी पसंद या अपने इस चयन पर दु:ख नहीं होताl क्या हमें इस तजूर्बे से सबक लेकर पार्टियों द्वारा थोपे हुए उम्मीदवार की बजाय आपस में मिलकर आम सहमति से किसी चरित्रशील व्यक्ति का चयन करके चुन कर नहीं भेजना चाहिएl अब समय आ गया है क़ि हमें पार्टियों के कुशासन को नकारते हुए पार्टी रहित विकल्प को अपना लेना चाहिएl
इससे अवश्य ही हम स्वच्छ राजनीति स्थापित करने में कामयाब हो सकेंगे तथा देश का माहौल बेहतर बना सकेंगेl मेरा निवेदन है कृपया इस पर अवश्य मंथन करे और अपने सुझाव देंl

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