"मतदाता
संगठन" की अथवा जनता की अपनी सरकार बनने पर 60 दिन के अन्दर अपने मताधिकार
का प्रयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को चाहे उसने मत किसी के भी पक्ष
में डाला हो आधिकारिक तौर पर 5000 रूपये का भुगतान सरकारी खजाने से किया
जायेगा क्योंकि उस व्यक्ति ने भारतीय संविधान के तहत अपने मताधिकार का
प्रयोग करके अपनी ड्यूटी अथवा अपने कर्तव्य का पालन किया हैl
इस दिन मतदाता अपने सारे काम छोड़ कर 3 से 4 घंटे लाइन में खड़ा होकर अपने इस कर्तव्य को निभाता है और इसके अतिरिक्त वह अपने "वोटर कार्ड" या "पहचान पत्र" जो कि एक सरकारी दस्तावेज है को भी पांच साल तक संभाल कर रखता है अथवा उसका चौकीदारा करता हैl
अतः इस सरकारी ड्यूटी को करने के लिए मतदाता को कम से कम 5000 रूपये के मानदेय का भुगतान करना बिल्कुल जायज है जोकि उस द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि के केवल एक दिन के वेतन के बराबर है जिसे वह विधायक या सांसद लगातार1826 दिन तक प्राप्त करता हैl
इस दिन मतदाता अपने सारे काम छोड़ कर 3 से 4 घंटे लाइन में खड़ा होकर अपने इस कर्तव्य को निभाता है और इसके अतिरिक्त वह अपने "वोटर कार्ड" या "पहचान पत्र" जो कि एक सरकारी दस्तावेज है को भी पांच साल तक संभाल कर रखता है अथवा उसका चौकीदारा करता हैl
अतः इस सरकारी ड्यूटी को करने के लिए मतदाता को कम से कम 5000 रूपये के मानदेय का भुगतान करना बिल्कुल जायज है जोकि उस द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि के केवल एक दिन के वेतन के बराबर है जिसे वह विधायक या सांसद लगातार1826 दिन तक प्राप्त करता हैl

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home